सुप्रीम कोर्ट ने वाणिज्यिक लेन-देन में 6 प्रतिशत से अधिक ब्याज की सिफारिश की

सुप्रीम कोर्ट ने वाणिज्यिक लेन-देन में 6 प्रतिशत से अधिक ब्याज की सिफारिश की

भोपाल [महामीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायालयों को डिक्री राशियों के लिए उचित ब्याज दर निर्धारित करने का अधिकार है। न्यायालय के पास यह निर्णय लेने का विवेकाधिकार भी है कि ब्याज किस तिथि से देय है चाहे वाद दायर करने की तिथि से उससे पहले की किसी तिथि से या डिक्री की तिथि से। न्यायालय ने कहा कि वाणिज्यिक लेन-देन में राशि के विलंबित भुगतान पर ब्याज दर के संबंध में पक्षों के बीच समझौते के अभाव में कानून के अनुसार तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता को ध्यान में रखते हुए सिविल प्रक्रिया संहिता के अनुसार ब्याज 6% प्रति वर्ष से अधिक हो सकता है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की जिसमें विवाद 1973 में राजस्थान राज्य को अपीलकर्ताओं द्वारा हस्तांतरित शेयरों के बढ़े हुए मूल्यांकन पर देय ब्याज की उचित दर के निर्धारण के बारे में था। यह राजस्थान राज्य द्वारा अपीलकर्ताओं को शेयरों के उचित मूल्य के भुगतान में देरी का मामला था जहां अपीलकर्ता को लगभग 50 वर्षों तक शेयरों के उचित मूल्य से वंचित रखा गया था।

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