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धर्म और अध्यात्म
धर्म
महर्षि संस्थान में यज्ञोपवीत संस्कार 20 अप्रैल को
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भोपाल [ महामीडिया]
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में व्रतबंध जिसे "उपनयन" या "यज्ञोपवीत" संस्कार भी कहा जाता है का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। यह संस्कार व्यक्ति के द्वितीय जन्म का प्रतीक माना जाता है जहां से व्यक्ति "द्विज "कहलाना शुरू करता है। इस शब्द का आध्यात्मिक एवं नैतिक महत्व है। व्रतबंध का प्रमुख उद्देश्य बालक को अनुशासन, पवित्रता और ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर करना होता है। इसमें धारण किए जाने वाला यज्ञोपवीत अर्थात जनेऊ तीन धागों से मिलकर बना होता है जो की देव ऋण, पितृ ऋण और ऋषि ऋण का स्मरण करवाता है। यह जातक को अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने और धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
इसका वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण निर्विवाद है। जनेऊ को कान पर लपेटने से विशिष्ट नसों पर दबाव बनता है जो की स्मरण शक्ति को बढ़ाने एवं एकाग्रता में सहायक माना जाता है। यह संस्कार चंचलता को त्याग कर गंभीरता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में एक महत्वपूर्ण योगदान देता है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ग के लोग अपने बालकों में यह अनुशासन की दीक्षा अवश्य प्रदान करते हैं। इस छात्र जीवन से ब्रह्मचर्य आश्रम की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है। इससे संस्कार, सदाचार, सुचिता और संयम के बीच बीज प्रस्फुटित होते हैं जो कि हमारी प्राचीन गुरुकुल शिक्षा पद्धति का एक आधार रही है। जिससे बालक एक सुसंस्कृत नागरिक बनता है। "यज्ञोपवीत" संस्कार केवल एक प्रथा नहीं है बल्कि अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाली एक पवित्र यात्रा है जो की बालकों को देवतुल्य गुणों की ओर ले जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए महर्षि महेश योगी संस्थान में महर्षि संस्थान के प्रमुख वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश जी की गरिमामय उपस्थिति में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया जा रहा है। इसमें महर्षि संस्थान के वैदिक पंडितों द्वारा वैदिक विधि विधान के साथ बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार किया जाएगा जो भी व्यक्ति इस कार्यक्रम में अपने बच्चों का यज्ञोपवीत संस्कार करवाना चाहते हैं वह ₹11,00 दक्षिणा शुल्क देकर संपर्क स्थापित कर सकते हैं ।
कार्यक्रम विवरण
दिनांक : 20 अप्रैल 2026, सोमवार
समय : प्रातः 10:30 से दोपहर 2:30 बजे तक
आयोजन स्थल : महर्षि मंगलम भवन, महर्षि विद्या मन्दिर रतनपुर, नर्मदापुरम मार्ग, भोपाल (म.प्र.)
सम्पर्क सूत्र : 9425008470, 989370046


