शिक्षकों को पात्रता परीक्षा देनी ही होगी
भोपाल [ महामीडिया] शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुनवाई की है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिकाओं पर कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि टीईटी परीक्षा में दी जाने वाली सभी आवश्यक छूट पहले ही दी जा चुकी हैं। अब आगे कोई अतिरिक्त रियायत नहीं मिलेगी। कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके शिक्षकों के लिए एक राहत भरा फैसला सुनाया है। केवल वह शिक्षक जिनकी सेवा के अब 5 वर्ष या उससे कम शेष हैं उन्हें टीईटी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। अन्य सभी शिक्षक जिन्होंने अब तक यह परीक्षा पास नहीं की है उन्हें पात्रता साबित करनी होगी। 1998 से 2009 के बीच नियुक्त किए गए शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने की मांग करते हुए याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं।