सातों दिनों भगवान महाकाल का श्रृंगार परिवर्तित होता है

सातों दिनों भगवान महाकाल का श्रृंगार परिवर्तित होता है

उज्जैन [महामीडिया] भगवान महाकाल का श्रृंगार पर्व त्योहार तथा सप्ताह के सात दिनों के आधार पर अलग-अलग रूप में किया जाता है। बुधवार के दिन महाकाल भगवान गणेश रूप में दर्शन देते हैं। नागपंचमी पर वासुकी नाग, जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण रूप, महाशिवरात्रि पर अर्धनारिश्वर रूप में भगवान का श्रृंगार किया जाता है। ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में भगवान महाकाल नित नए रूपों में भक्तों का मन मोहते हैं। प्रतिदिन पांच आरती में पुजारी भगवान का विशेष श्रृंगार करते हैं। मंदिर की पूजन परंपरा में भगवान का भांग, चंदन और मावे से श्रृंगार किया जाता है। खास बात यह है कि कोई भी भक्त भगवान महाकाल का श्रृंगार करा सकता  हैं। इसके लिए श्रद्धालु को मंदिर कार्यालय में श्रृंगार के लिए निर्धारित 1100 रुपये की रसीद कटवाना होती है। श्रृंगार सामग्री व पूजन की राशि पुजारी को अलग से देना होती है।महाकाल मंदिर में तड़के 4 बजे भस्म आरती, सुबह 7.30 बजे द्धयोदक (बालभोग) आरती, सुबह 10.30 बजे भोग आरती, शाम 7.30 बजे संध्या आरती तथा रात 10.30 बजे शयन आरती होती है। प्रतिदिन होने वाली इन पांच आरती में से शयन आरती को छोड़कर प्रथम चार आरती में भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है। संध्या आरती में भगवान का भांग से श्रृंगार की परंपरा है। जबकि भस्म आरती, द्धयोदक तथा भोग आरती में भांग, चंदन तथा मावे में से किसी एक सामग्री से श्रृंगार किया जाता है।

 

 

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