हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाना होगा

हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड उपलब्ध करवाना होगा

भोपाल [महामीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को एक आदेश में कहा कि हर स्कूल में लड़कियों को सैनेटरी पैड बांटना अनिवार्य होगा। स्कूल में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग वॉशरूम बनाने होंगे। जो प्राइवेट स्कूल ऐसा नहीं कर पाएंगे उनकी मान्यता रद्द की जाएगी। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट नहीं हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 14 (बराबरी का अधिकार) का उल्लंघन है। अगर लड़कियों को सैनिटरी पैड नहीं मिलते तो वह लड़कों की तरह बराबरी से पढ़ाई और गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पातीं। मासिक धर्म के दौरान सम्मानजनक सुविधा मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का हिस्सा है। अगर लड़कियों को उचित सुविधा नहीं मिलती तो उनकी गरिमा और निजता प्रभावित होती है।इसी के साथ अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी स्कूलों में दिव्यांगों के लिए अनुकूल शौचालय उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। वहीं सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्कूलों में महिला और पुरुष छात्रों के लिए अलग-अलग शौचालय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जो जीवन का अधिकार है उसमें मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य का अधिकार भी शामिल है। इस अहम टिप्पणी के साथ कोर्ट ने अपने आदेश में कई और अहम बातें कहीं.सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह फैसला सिर्फ व्यवस्था से जुड़े लोगों के लिए नहीं है बल्कि यह कक्षाओं के लिए भी है जहां लड़कियां मदद मांगने में झिझकती हैं। यह आदेश उन शिक्षकों के लिए भी है जो मदद करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह आदेश उन माता-पिता के लिए भी है जिन्हें शायद अपनी चुप्पी के असर का एहसास नहीं है और ये आदेश समाज के लिए भी है ताकि यह साबित हो सके कि प्रगति का माप इस बात से होता है कि हम सबसे कमजोर लोगों की रक्षा कैसे करते हैं। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा ‘हम हर उस बच्ची को यह संदेश देना चाहते हैं जो शायद इसलिए स्कूल नहीं जा पाती क्योंकि उसके शरीर को बोझ समझा जाता है।लेकिन इसमें उसकी कोई गलती नहीं है ।कोर्ट ने कहा कि हमारे ये शब्द अदालतों और कानूनी समीक्षा रिपोर्टों से परे समाज के हर तबके तक पहुंचने चाहिए। जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने क्लास 6 से 12 तक की छात्राओं के लिए सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में केंद्र सरकार की मासिक धर्म स्वच्छता नीति को पूरे भारत में लागू करने पर यह आदेश सुनाया यह जिसे एक ऐतिहासिक निर्णय माना जा रहा है । 

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