भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय की सुनवाई में भाग नहीं लेगा
भोपाल [महामीडिया] भारत ने सिंधु जल संधि के तहत हेग में चल रही मध्यस्थता कार्यवाही को दृढ़ता से खारिज कर दिया है यह स्पष्ट करते हुए कि वह मध्यस्थता अदालत की वैधता को मान्यता नहीं देता है और इसकी सुनवाई में भाग नहीं लेगा।
यह रुख ऐसे समय में आया है जब हेग स्थित अदालत ने 2-3 फरवरी के लिए नए सिरे से सुनवाई निर्धारित की है और भारत को अपनी बगलिहार और किशनगंगा पनबिजली परियोजनाओं से परिचालन "पॉन्डेज लॉगबुक" पेश करने का आदेश दिया है जिसे वह "योग्यता के आधार पर दूसरा चरण" कहता है। भारत का कहना है की मध्यस्थता अदालत अवैध रूप से गठित" की गई है और एक तटस्थ विशेषज्ञ प्रक्रिया के लागू होने के बावजूद समानांतर कार्यवाही कर रही है।
चूंकि हम मध्यस्थता न्यायालय की वैधता को नहीं मानते इसलिए हम इसकी किसी भी संवाद का उत्तर नहीं देते।