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म.प्र.में कई आयोग सफेद हाथी बने
भोपाल [महामीडिया] म.प्र. में महिलाओं और किसानों को न्याय दिलाने के लिए बनाए गए कई संवैधानिक आयोग एक अरसे से बदहाली के शिकार हैं। प्रदेश के 20 आयोगों में से लगभग 40 प्रतिशत का पुनर्गठन अब तक नहीं हुआ है जबकि कुछ आयोग प्रभार के भरोसे चल रहे हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सदस्य और सदस्य सचिव के 30 से अधिक पद वर्षों से रिक्त हैं। इसका सीधा असर न्याय पर पड़ा है। हजारों की संख्या में शिकायतें लंबित हैं और पीडि़त अदालतों के दरवाजे खटखटाने को मजबूर हैं। मानवाधिकार आयोग में अध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है। एकमात्र सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है जबकि सुनवाई के लिए कम से कम दो सदस्यों की अनिवार्यता है। नतीजतन आयोग सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित है। उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में न तो अध्यक्ष है न ही सचिव। मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग आधी आबादी के अधिकार सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए गठित है लेकिन यह सरकारी उदासीनता का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। आयोग में 2018 के बाद से न तो अध्यक्ष है न उपाध्यक्ष और न सदस्य।