पाले से बचाव हेतु कुछ कदम

पाले से बचाव हेतु कुछ कदम

कटनी [महामीडिया] शीतलहर चलने से जिले में ठंड की समस्या बढ़ रही है जिसमें रबी फसलें जैसे-मसूर, सरसों, चना, तुअर एवं सब्जी फसलों में पाला पड़ने की संभावना  बढ़  जाती है। जब वायुमंडल का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से 0 डिग्री सेल्सियस या इसके नीचे चला जाता है एवं जिसकी वजह से पौधों की कोशिकाओं के अंदर और ऊपर मौजूद पानी जम जाने को पाला कहते है। पाले से फसलों पर विभिन्न प्रभाव पडते है, जिसमें पौधों की जडे खाद का उपयोग नहीं कर पाती। प्रमाणित फसल का हरा रंग (क्लोरोफिल) समाप्त होने लगता है तथा पत्तियों का रंग मिट्टी के रंग जैसा दिखता है। पाले से पौधे की वृद्धि रुक जाती है। बैक्टीरिया जनित एवं फफूंद जनित बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। खेत के चारों ओर धुआं कर पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। रात में पाला पड़ने की संभावना हो तब खेत में बोर के ताजे पानी से हल्की सिंचाई करनी चाहिये सिंचाई करने से 0.5-2 डिग्री सेल्सियस तक मिट्टी का तापमान बढ़ जाता है। जिस खेत में नर्सरी लगायी गयी है वहां उसे प्लास्टिक या धान के पुलाव द्वारा  ढक कर  पाले से बचाया जा सकता है। जिस दिन पाला पड़ने की संभावना हो उन दिनों फसलों पर गंधक के तेजाब के 0.1 प्रतिशत घोल का छिडकाव करना चाहिये इस हेतु गंधक का तेजाब 1 मिली/लीटर के हिसाब से उपयोग करना चाहिये। 

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