सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग का संज्ञान लिया

सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग का संज्ञान लिया

भोपाल [महामीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने किशोरों को  पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग मामले में संज्ञान लिया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस समस्या पर रोक लगाने के लिए वह 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाने पर विचार करे ताकि उन किशोरों को बचाया जा सके जो नासमझी में आपसी सहमति से रिश्ते बनाते हैं।  इसका उद्देश्य वास्तविक किशोर संबंधों को पॉक्सो की कठोर धाराओं से मुक्त रखना है। कई बार किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों में परिवारों द्वारा विरोध होने पर लड़के के खिलाफ पॉक्सो के तहत मामला दर्ज करा दिया जाता है। चूंकि पॉक्सो में सहमति का कोई स्थान नहीं है। ऐसे में नाबालिग होने के बावजूद आरोपी को गंभीर जेल की सजा भुगतनी पड़ती है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि ऐसे कानून लाएं जाएं जो यह पहचान सके कि कौन से मामले गलत हैं और कौन से वास्तव में अपराध है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर की बेंच ने कहा कि पॉक्सो जैसे सख्त कानून के बड़े पैमाने पर गलत उपयोग को रोकने के लिए 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाना जरुरी है।

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