जीवन की उत्कृष्टता के लिए कल्पवास

जीवन की उत्कृष्टता के लिए कल्पवास

भोपाल [महामीडिया]  कल्पवास वास्तव में किसी भी व्यक्ति के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन में एक सर्वोच्च उत्कृष्टता का शिखर है।इस कठिन व्रत में सूर्याेदय से पूर्व स्नान, संयमित आहार, ब्रह्मचर्य, नियमित जप-तप, भजन-कीर्तन और साधना का विधान है। यद्यपि शास्त्रों में दिन में तीन बार स्नान का उल्लेख मिलता है पर सामान्यतः लोग प्रातः और सायं स्नान करते हैं। कल्पवास का समापन विधिवत् उद्यापन के साथ किया जाता है। मान्यता है कि जो साधक बारह वर्षों तक निरंतर कल्पवास करता है वह मोक्ष का अधिकारी बनता है। ‘कल्प’ शब्द का अर्थ केवल सृष्टि-चक्र से ही नहीं अपितु ‘कायाकल्प’ से भी जुड़ा है। आयुर्वेद में कल्प- चिकित्सा के माध्यम से शरीर-शोधन और दीर्घायु की प्रक्रिया बताई गई है। गंगा तट पर रहकर गंगाजल का सेवन, सात्त्विक आहार, सूर्य अर्घ्य, स्नान और नियमित साधना शरीर एवं मन को शुद्ध कर आध्यात्मिक चेतना को जागृत करती है। इसलिए यह केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि एक विज्ञान सम्मत प्रक्रिया है जो मानवीय जीवन को उत्कृष्टता प्रदान करती है। शारीरिक एवं मानसिक उच्च अवस्था को प्राप्त करने के लिए कल्पवास भारतीय प्राचीन परंपरा का एक जीवंत उदाहरण है जो मानवीय जीवन की गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखता है। त्रिवेणी के संगम तट पर स्नान दान की परंपरा भारत के प्राचीन ऋषि मुनियों की परंपरा का वह आत्मबोध है जो विश्व कल्याण के कार्य के लिए पूरी दुनिया को एक परिवार मानता है।

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