म.प्र.बाल अधिकारों के क्रियान्वयन में पिछड़ा

म.प्र.बाल अधिकारों के क्रियान्वयन में पिछड़ा

भोपाल [महामीडिया] म.प्र. में 18 साल से कम उम्र के बच्चों के अधिकारों को सरंक्षित करने वाला राज्य बाल अधिकार आयोग पांच माह से गठन का इंतजार कर रहा। आयोग का गठन नहीं होने से कई प्रकरण लंबित पड़े हुए हैं। शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं और बच्चों के हितों का हनन हो रहा है। कार्रवाई नहीं होने से संस्थाएं भी मनमानी कर रही हैं। हालांकि आयोग का गठन करने के लिए आवेदन जमा करा लिए गए हैं। अभी आवेदनों की स्क्रूटनी चल रही है।  उक्त प्रोफाइल में से छह सदस्य और एक अध्यक्ष का चयन किया जाएगा। आयोग का गठन होली के बाद ही होने के कयास लगाए जा रहे हैं। बता दें कि तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सितंबर 2025 से आयोग में पद खाली हैं। नये अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त करने के लिए शासन ने आवेदन जमा करा लिए हैं। अंतिम तिथि तक शासन को करीब 400 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसमें करीब 275 आवेदन सदस्य और करीब 165 आवेदन सिर्फ अध्यक्ष बनने के लिए दिए गए हैं। उम्मीदवारों ने अध्यक्ष बनने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है। इसलिए कुछ उम्मीदवारों ने अध्यक्ष के साथ सदस्य बनने के लिए भी आवेदन जमा किए हैं। शासन स्तर पर आवेदनों की स्क्रूटनी कार्य कछुआ चाल की तरह धीरे-धीरे हो रहा है।
प्रदेश में पांच माह से राज्य बाल अधिकार आयोग अस्तित्व में नहीं है। राज्य के अलग-अलग जिलों से लगातार शिकायतें आयोग के कार्यालय में पहुंच रही हैं। आयोग नहीं होने के कारण कार्यालय से शिकायतें सिर्फ अग्रेषित होकर जमा होती जा रही हैं। जब आयोग का गठन हो जाएगा। इसके बाद ही उनका निराकरण किया जाएगा।

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