सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति

सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति

भोपाल [महामीडिया] मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक विशेष पर्व है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होता हैजो उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। उत्तरायण का अर्थ है,सूर्य की यात्रा दक्षिण से उत्तर की ओर शुरू होना,जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। इस बदलाव को न केवल मौसम में बल्कि जीवन में भी नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है। इसी दिन भगवान सूर्य ने अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए उनके घर का दौरा किया था। इसलिए यह दिन पिता-पुत्र के संबंधों के महत्व को भी दर्शाता है। धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्य की उपासना करना विशेष फलदायी होता है।मकर संक्रांति केवल भौतिक ऊर्जा और समृद्धि का उत्सव नहीं है,बल्कि यह आध्यात्मिक उन्नति का भी पर्व है। इस दिन सूर्योदय के समय पूजा और ध्यान करना,नदियों में स्नान करना और तिल-गुड़ खाकर अच्छे कार्यों की शुरुआत करना आध्यात्मिक रूप से व्यक्ति को शुद्ध और ऊंचा बनाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य देव की उपासना करने का महत्व वेदों और पुराणों में बताया गया है। सूर्य ऊर्जा, प्रकाश और जीवन के स्रोत हैं। ऋग्वेद में सूर्य को आत्मा का पोषक और समस्त सृष्टि का आधार कहा गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सूर्य उपासना से रोग, शोक और दरिद्रता का नाश होता है। सूर्यनारायण का पूजन करने वाला व्यक्ति प्रज्ञा, मेधा तथा  सभी समृद्धियों से संपन्न होता हुआ चिरंजीवी होता है । यदि कोई व्यक्ति सूर्य की मानसिक आराधना भी करता है तो वह समस्त व्याधियों से रहित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता है । 

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