विश्व गुरु महर्षि महेश योगी जी की पुण्यतिथि पर महर्षि परिवार ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए
भोपाल [महामीडिया] आज पूरी दुनिया में वैश्विक संत भावातीत ध्यान, सिद्धि, यौगिक उड़ान एवं महर्षि चेतना आधारित शिक्षा पद्धति के जनक परम पूज्य महर्षि महेश योगी जी को उनके पुण्यतिथि पर महर्षि महेश योगी संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी एवं महर्षि परिवार के समस्तअधिकारियों, कर्मचारियों सहित उनके अनुयायियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए संकल्प लिया कि वे ब्रह्मचारी गिरीश जी के सतत मार्गदर्शन में महर्षि जी के संकल्पों को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य करते रहेंगे। ज्ञात हो की आज महर्षि महेश योगी जी की पुण्यतिथि है जो कि 2008 में नीदरलैंड स्थित अपने आवास पर ब्रह्मलीन हुए थे। महर्षि महेश योगी जी का जन्म 1917 में छत्तीसगढ़ के पांडुका ग्राम में हुआ था जो की अभिभाजित म.प्र का एक हिस्सा है।
महर्षि जी ने हम सभी को भावातीत ध्यान पद्धति का उपहार दिया है। जिसका हम प्रातः एवं संध्या प्रतिदिन 20-20 मिनट का अभ्यास कर प्रत्येक व्यक्ति अपने मन को शांत कर सकता है । ऐसे ही शांत व्यक्ति अपने जीवन में सभी कार्यों में सफलता अर्जित करते हैं । महर्षि ने 1960 के दशक में इसका अभ्यास कराना आरम्भ किया था और तब से तब से संपूर्ण विश्व के करोड़ों व्यक्ति इसका निरंतर एवं नियमित अभ्यास करके असंख्य शारीरिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर महर्षि चेतना आधारित शिक्षा पद्धति महर्षि जी की एक देन है जिसे पढ़ने एवं पढ़ाने वाले दोनों को न केवल अच्छा लगता है बल्कि दोनों के बीच संबंध मधुर एवं जागृत हो जाते हैं। इससे शिक्षा ग्रहण करने की क्षमता में बहुत अधिक वृद्धि हो जाती है और मन में वह सभी चीजें कंठस्थ हो जाती है जो की अन्य शिक्षा पद्धति में संभव नहीं होती। महर्षि जी ने शिक्षा के मूल के विलुप्त तत्व शुद्ध चेतना के क्षेत्र (भावातीत चेतना) को प्रकाशित किया है जो विचार के स्रोत पर निहित है एवं प्राकृतिक विधानों के उद्गम का स्रोत है । महर्षि वैदिक शिक्षा प्रणाली में संस्थाएं चेतना का पूर्ण सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान उपलब्ध कराती हैं जो विद्यार्थियों के जीवन में समस्त संभावनाओं का द्वार खोलती हैं ।
इसी प्रकार महर्षि महेश योगी जी ने पूरी दुनिया के सामने वैदिक वांग्मय के 40 क्षेत्रों को प्रस्तुत किया और बताया कि यह 40 के 40 क्षेत्र हमारी शारीरिक संरचना के क्षेत्र में उपस्थित हैं। उन्होंने बताया था कि वैदिक वांग्मय के जो 40 क्षेत्र हमारी शारीरिक संरचना में उपस्थित हैं की उपस्थिति मात्र से संपूर्ण शरीर एवं मन वैदिक हो जाता है। यह सैकड़ो शोधों के द्वारा प्रमाणित हो चुका है लेकिन वर्तमान समय में वैदिक ज्ञान के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। महर्षि वेद विज्ञान का लक्ष्य संतुलन, आंतरिक शांति और व्यक्तिगत परिवर्तन लाना है। इसने पारंपरिक ज्ञान और समकालीन अंतर्दृष्टि के मिश्रण के लिए ध्यान आकर्षित किया है जो व्यक्तियों को कई स्तरों पर अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक उपकरण प्रदान करती है ।
महर्षि जी की इन्हीं वैश्विक उपलब्धियां को रेखांकित करते हुए आज परम पूज्य महर्षि जी के पुण्यतिथि के अवसर पर उनके तपोनिष्ठ शिष्य महर्षि महेश योगी संस्थान के प्रमुख ब्रह्मचारी गिरीश जी सहित महर्षि संस्थान के समस्त अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अनुयायियों ने उन्हें स्मरण करते हुए उनके परम शिष्य द्वारा किए जा रहे कार्यों को आगे बढ़ाने एवं महर्षि जी के संकल्पों को पूरा करने के लिए अपनी - अपनी प्रतिबद्धताओं को दुहराया।