सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज

नई दिल्ली (महामीडिया): कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा को आज देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे पार्लियामेंट्री पैनल की कानूनी वैधता को चुनौती दी थी.

बता दें, जस्टिस वर्मा ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी कि उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया था. ऐसे में दोनों सदनों की तरफ से एक ज्वाइंट कमेटी बननी चाहिए थी.

यह सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच कर रही थी. वहीं, जस्टिस दत्ता ने बेंच की तरफ से फैसला सुनाया. बेंच ने पांच सवाल बनाए और उनके जवाब दिए. जस्टिस दत्ता ने कहा कि पहला सवाल, जॉइंट कमेटी का गठन, जहां एक ही दिन दोनों सदनों में नोटिस दिया गया हो, उसके बाद एक सदन के पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं और दूसरे सदन के पीठासीन अधिकारी उसी प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं. इस पर जस्टिस दत्ता ने मामले को साफ करते हुए कहा कि नहीं, ऐसा नहीं है. यह नियम सिर्फ एक खास स्थिति पर लागू होता है, यानी, जब एक ही दिन दिए गए प्रस्ताव के नोटिस दोनों सदनों द्वारा स्वीकार कर लिए गए हों. यह किसी भी सदन के व्यक्तिगत अधिकार को सीमित या नकारता नहीं है.

उन्होंने कहा कि दूसरा मुद्दा यह है कि क्या राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन प्रस्ताव की सूचना को मानने से मना करने के काबिल हैं. उन्होंने इसका जवाब हां में दिया. वहीं, जस्टिस दत्ता ने तीसरा सवाल करते हुए कहा कि डिप्टी चेयरमैन के प्रस्ताव को मानने से मना करने पर स्पीकर के एक्शन की वैधता पर क्या असर होगा. इस पर जस्टिस दत्ता ने जवाब देते हुए कहा कि इस मामले की जांच करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि डिप्टी चेयरमैन के ऑर्डर को चैलेंज नहीं किया गया है. बहस करो, अगर इसकी जांच भी हो जाए. तो इसका कोई असर नहीं होगा क्योंकि स्पीकर ने कमेटी बनाकर कोई गैर-कानूनी काम नहीं किया है.

इसस पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार 8 जनवरी को जस्टिस वर्मा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने कहा कि दोनों सदनों की सहमति से ही जज को उसके पद से हटाया जा सकता है.

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