सामूहिक सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक बना गणेश उत्सव

सामूहिक सांस्कृतिक शक्ति का प्रतीक बना गणेश उत्सव

भोपाल [महामीडिया] इस वर्ष प्रदेश में  गणेश उत्सव की धूम मची हुई है। एकजुटता से यह आयोजन विशेष बन गया है।  इस उत्सव को सफल बनाने में सभी अपना-अपना योगदान दे रहे हैं । प्रतिदिन सुबह और शाम के समय सभी लोग एकत्र होकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते हैं। इस आयोजन से प्रदेश में उत्सव का माहौल बना हुआ है। सभी लोग  ग्रामीण बढ़-चढ़कर इस धार्मिक आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं। गणेश उत्सव के इस सामूहिक आयोजन ने प्रदेश की एकता और सामाजिक सद्भाव को और मजबूत किया है।जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हुई है। गणेश उत्सव केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान सामूहिक भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक पहलुओं से जुड़े आयोजन हो रहे हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। विशेष रूप से महाराष्ट्र और उत्तर भारत के कई हिस्सों में गणेश उत्सव का उत्साह देखने लायक  है। मुंबई और पुणे में तो पंडालों की भव्यता और विशाल झांकियां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह ले रही हैं। 27 अगस्त से शुरू हुआ यह पर्व 10 दिनों तक चलेगा और अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। इस दौरान “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठेगा।

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