अजमेर शरीफ पर 'चादर' की परंपरा नहीं टूटेगी

अजमेर शरीफ पर 'चादर' की परंपरा नहीं टूटेगी

भोपाल [महामीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अजमेर शरीफ दरगाह पर औपचारिक 'चादर' चढ़ाने से रोकने के निर्देश देने वाली याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा की यह मुद्दा न्याय योग्य नहीं है।चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा इस्लामिक विद्वान ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती और अजमेर दरगाह को राज्य प्रायोजित औपचारिक सम्मान और प्रतीकात्मक मान्यता देने को चुनौती दी गई थी।अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के सालाना उर्स पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा लगातार चादर चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चल रही है।यह चादर विशेष रूप से दरगाह के लिए बनाई जाती है और हर साल उसके अवसर पर वहां पेश की जाती है। यह परंपरा दशकों से जारी है और नेहरू से लेकर मोदी तक सभी प्रधानमंत्रियों द्वारा निभाई जाती रही है।इसके अलावा, राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री की ओर से भी उर्स के अवसर पर चादर चढ़ाई जाती है।पाकिस्तान और बांग्लादेश सरकारें भी इस अवसर पर अपनी ओर से चादर पेश करती रही हैं।

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