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महाकुंभ में त्रिजटा स्नान
प्रयागराज [महामीडिया] महाकुंभ में संगम की रेती पर कल्पवासियों के लिए पुण्य अर्जन का सिलसिला अभी जारी है। माघ पूर्णिमा के बाद भी हजारों श्रद्धालु तीन दिनों तक त्रिजटा स्नान कर अपने आध्यात्मिक संकल्प को पूरा कर रहे हैं। त्रिजटा स्नान का महत्व उन श्रद्धालुओं के लिए है जो माघ पूर्णिमा के बाद भी संगम में स्नान कर अपनी धार्मिक मान्यताओं को निभाते हैं। मान्यता है कि त्रिजटा स्नान से पूरे माघ मास के स्नान का पुण्य प्राप्त होता है।‘त्रिजटा’ का अर्थ है 3 धाराएं– गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती। इस स्नान को कर्म, भक्ति और ज्ञान का संगम भी माना जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। कल्पवासी पूरे माह संयम, साधना और तपस्या के साथ संगम की रेती पर भूमि शयन करते हैं। वे अपनी साधना में किसी प्रकार की कमी नहीं रहने देना चाहते, इसलिए पूर्णिमा स्नान के बाद भी तीन दिनों तक स्नान करते हैं। त्रिजटा स्नान को अधूरे स्नान की पूर्ति के रूप में भी देखा जाता है, जिससे कल्पवास का संकल्प पूरा होता है।