म.प्र.के 62 प्रतिशत सरकारी स्कूल एआई शिक्षा से वंचित
भोपाल [महामीडिया] शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग व्यक्तिगत शिक्षण, बुद्धिमान ट्यूटरिंग सिस्टम, और प्रशासनिक कार्यों के स्वचालन के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है। यह तकनीक छात्रों की जरूरतों के अनुसार सामग्री को अनुकूलित करती है और वास्तविक समय में फीडबैक प्रदान करती है जिससे शिक्षकों का बोझ कम होता है। इसको देखते हुए केंद्र सरकार ने पिछले पांच साल में प्रदेश को 318.52 करोड़ रुपए दिए ताकि स्कूलों को डिजिटल बनाया जा सके। लेकिन राज्य इस फंड का 85 प्रतिशत उपयोग नहीं कर पाया है। इसका परिणाम यह देखने को मिल रहा है कि प्रदेश के 62 प्रतिशत सरकारी स्कूल लैब्स और स्मार्ट क्लासरूम नहीं होने के कारण एआई शिक्षा से दूर हैं।मप्र में सरकार का दावा है कि वह सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों की तरह डिजिटल क्लासरूम बनाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बच्चों को शिक्षित करने की कोशिश में लगी हुई है। लेकिन सरकार के दावों की हकीकत यह है कि प्रदेश में 62 प्रतिशत सरकारी स्कूल एआई शिक्षा से बेहद दूर हैं। बिना इंटरनेट और आईसीटी लैब या डिजिटल क्लासरूम के एआई शिक्षा संभव नहीं है और प्रदेश का हाल ये है कि यहां लैब्स और स्मार्ट क्लासरूम बनाने के लिए मिला फंड पांच साल में भी 85 फीसदी खर्च नहीं हो सका है। प्रदेश के जिन सरकारी स्कूलों में इंटरनेट है, वहां भी तस्वीर पूरी नहीं है। इन 12,933 स्कूलों में से केवल 2,610 स्कूल ऐसे हैं, जहां कंप्यूटर लैब या स्मार्ट क्लास सही तरीके से चल रही है। सिर्फ 34 प्रतिशत छात्रों के पास घर पर लैपटॉप या टैबलेट है।