पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व का मुद्दा गरमाया
मुंबई [ महा मीडिया] पश्चिम बंगाल में इस साल रामनवमी 27 मार्च का उत्सव केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह आगामी चुनावों के लिए एक बड़ा 'सियासी लिटमस टेस्ट' बन गया है। बीजेपी इस बार रामनवमी के मंच से बांग्लादेश और बंगाल के विभिन्न जिलों जैसे मुर्शिदाबाद और आसनसोल में हिंदुओं पर हुए कथित अत्याचारों और हत्याओं के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है दूसरी ओर मालदा जैसे जिलों में 52 से अधिक संगठनों ने मिलकर 5 किलोमीटर लंबी भव्य रैली निकालने का निर्णय लिया है। बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए तृणमूल कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति बदल दी है। टीएमसी के पार्षद और नेता अब सार्वजनिक रूप से कह रहे हैं कि "जय श्री राम" कहने से राम सिर्फ बीजेपी के नहीं हो जाते वह सबके हैं। हुगली जैसे जिलों में टीएमसी 'अस्त्रहीन संकीर्तन रैली' निकालने की तैयारी कर रही है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि वे हिंदू विरोधी नहीं हैं। कोलकाता हाईकोर्ट ने इस बार भी हावड़ा में रामनवमी जुलूस की अनुमति तो दी है लेकिन हथियारों के प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने 'अंजनी पुत्र सेना' जैसे संगठनों को 26 मार्च की सुबह एक निश्चित समय सीमा के भीतर जुलूस निकालने की अनुमति दी है।