नवीनतम
होली पर्व की तैयारियां जोरों पर
भोपाल [महामीडिया] होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं बल्कि सदियों पुरानी परंपरा है जो अच्छाई की जीत का संदेश देती है। होलिका दहन इसकी शुरुआत है जहां शाम को अग्नि में बुराई जलती है और सुबह होलिका की पूजा से दिन की शुरुआत होती है। परिवार के साथ मिलकर पूजा करने से घर में खुशियां बनी रहती हैं। इस साल होलिका दहन 3 मार्च को प्रदोष काल में होगा गाय के गोबर के उपलों से बनी माला होलिका दहन में सबसे महत्वपूर्ण है. मान्यता है कि हर उपला परिवार के सदस्य के नाम से अग्नि में डाला जाता है। इससे हर सदस्य पर सुरक्षा कवच बनता है। रंगों के पर्व होली में मात्र दिन शेष हैं। ग्रामीण अंचल में होली की रंगत छाने लगी है। हर वर्ग होली को अपने-अपने अंदाज में मनाने में लगा है। वहीं परंपरागत तरीके से होली पर्व मनाने को लेकर महिलाओं ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। महिलाओं ने होलिका पूजन के लिए बड़कुले और ढाल तैयार किए हैं। गाय के गोबर से तैयार की गई ये पारंपरिक चीजे रीति रिवाज से जुड़ी हैं।होलिका पूजन के दौरान महिलाएं बच्चों की दीर्घायु के लिए ही इन बड़कुलो और ढाल को पूजन के लिए प्रयोग करेंगी। दशमी व एकादशी के दिन घरों में ढाल आदि बनाने शुरू हो जाते हैं जिनकी पूर्णिमा के दिन माला बनाकर पूजा-अर्चना कर उनको भोग लगाया जाता है। इसके बाद शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया जाता है।होलिका पूजन से करीब सप्ताह भर पहले ही ढाल बुडकूले तैयार किए जाते हैं ये परंपराएं सदियों से चली आ रही है। होलिका दहन से पहले इनका पूजन होता है। इस दौरान बच्चों की लंबी आयु की कामना भी की जाती है। होली का पर्व परंपराओं से भी जुड़ा हैं इसलिए ज्यादा भूमिकाएं महिलाओं को ही निभानी पड़ती है।