माँ ज्वाला देवी मंदिर का रहस्य

माँ ज्वाला देवी मंदिर का रहस्य

भोपाल [महामीडिया] चैत्र नवरात्र की अवधि को बेहद शुभ माना जाता है। चैत्र नवरात्र में धरती पर मां दुर्गा का आगमन होता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही मां दुर्गा की कृपा प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। वहीं नवरात्र में मां दुर्गा के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। शक्तिपीठों में ज्वाला देवी मंदिर भी शामिल है। चैत्र नवरात्र में अधिक संख्या में भक्त ज्वाला देवी के दर्शन करते हैं। नवरात्र के दौरान बेहद भव्य नजारा देखने को मिलता है। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में स्थित है। इस मंदिर में घी और बाती के बिना नौ प्राकृतिक ज्वालाएं लगातार जल रही हैं। मंदिर के अंदर 9 ज्वालाएं बिना घी और बाती के जल रही हैं। मुख्य ज्वाला को माता महाकाली का रूप माना जाता है। अखंड रूप से प्रज्वलित हैं। मंदिर में कुल 9 स्थानों से ज्वालाएं निरंतर जलती रहती हैं जिन्हें 9 देवियों का प्रतीक माना जाता है ज्वाला देवी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां जलने वाली ज्योतियां कभी बुझती नहीं हैं।यह सदियों से लगातार जल रही हैं।वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो माना जाता है कि यहां जमीन के नीचे प्राकृतिक गैस (जैसे मिथेन) के भंडार हैं जो सतह पर आकर जल उठते हैं लेकिन भक्तों के लिए यह केवल वैज्ञानिक घटनानहीं बल्कि एक दिव्य चमत्कार है। उनका विश्वास है कि यह स्वयं मां ज्वाला की शक्ति है जो इस रूप में प्रकट होती है और अपने भक्तों की रक्षा करती है।

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