पारिस्थितिक तंत्र के उन्नयन का मार्ग है विश्व आर्द्रभूमि दिवस

पारिस्थितिक तंत्र के उन्नयन का मार्ग है विश्व आर्द्रभूमि दिवस

भोपाल [महामीडिया] विश्व आर्द्रभूमि दिवस हर वर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है जिसका उद्देश्य आर्द्रभूमियों की महत्त्वपूर्ण भूमिका के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है। यह पारिस्थितिक तंत्र जैव विविधता, मानव कल्याण और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने में अहम योगदान देते हैं। 2025 की थीम ‘हमारे साझा भविष्य के लिए आर्द्रभूमियों की रक्षा’ है जो जलवायु परिवर्तन से निपटने और सतत आजीविका के लिए आर्द्रभूमियों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देती है। यह दिन आर्द्रभूमि पर रामसर कन्वेंशन को अपनाने का भी प्रतीक है जिस पर 1971 में ईरान के रामसर में हस्ताक्षर किए गए थे। आर्द्रभूमि दलदल, दलदल, झील और नदियाँ जैसी जगहें हैं जो साल के सभी या कुछ समय के लिए पानी से ढकी रहती हैं। यह क्षेत्र हमारे ग्रह को स्वस्थ रखने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। वे पानी को संग्रहीत करने, उसे फ़िल्टर करने, वन्यजीवों की रक्षा करने और बाढ़ को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।

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