समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक बैसाखी फसल पर्व कल
भोपाल [ महामीडिया] बैसाखी का पर्व उत्तर भारत में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह समय रबी की फसल, खासकर गेहूं की कटाई का होता है। किसान अपनी मेहनत की फसल घर लाने की खुशी में यह त्योहार मनाते हैं और भगवान और प्रकृति को धन्यवाद करते हैं। इसके अलावा धार्मिक दृष्टि से भी यह दिन बहुत खास माना जाता है। इसी दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं ऐसे में बैसाखी को वैशाख संक्रांति और मेष संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। 14 अप्रैल को पुण्यकाल सुबह 5 बजकर 56 मिनट से लेकर शाम 3 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। इस समय स्नान, दान और पूजा को विशेष फलदायी माना जा रहा है।बैसाखी का त्योहार मुख्य रूप से फसल (रबी) की कटाई का पर्व है। इस समय रबी फसल पककर तैयार हो जाती है और किसान अपनी मेहनत का फल पाते हैं। खेतों में सुनहरी बालियां लहराती हैं इसलिए बैसाखी को समृद्धि, खुशहाली और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग पारंपरिक नृत्य जैसे भांगड़ा और गिद्धा कर अपनी खुशी जाहिर करते हैं और ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।