वैशाख मास में जल दान की परंपरा
भोपाल [ महा मीडिया] अभी वैशाख मास चल रहा है यह दूसरा महीना है। इसे माधव मास भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी महीने से त्रेता युग शुरू हुआ था। इस महीने के संबंध में शास्त्रों में कहा गया है कि जिस प्रकार विद्याओं में वेद और वृक्षों में कल्पवृक्ष श्रेष्ठ है उसी प्रकार सभी महीनों में वैशाख मास सर्वोत्तम है। इस महीने में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और जल दान करने की परंपरा है। चूंकि वैशाख का महीना ग्रीष्म ऋतु का समय होता है, इसलिए इस महीने में ठंडक प्रदान करने वाली वस्तुओं के दान पर जोर दिया गया है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, मिट्टी के घड़े का दान करना, पंखा, छाता और सत्तू का दान इस महीने में अक्षय पुण्य देता है। जल की रक्षा करना और पौधों को पानी देना इस समय की सबसे बड़ी पूजा मानी गई है।