सयुंक्त परिवार प्रथा का संदेश देता है अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 

सयुंक्त परिवार प्रथा का संदेश देता है अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 

भोपाल [ महामीडिया] संयुक्त परिवार जितना दुनिया में मूल्यवान कुछ भी नहीं है। हिन्दू संयुक्त परिवार जिसमें एक साथ एक ही घर में कई पीढ़ियों के लोग रहते हैं जिस परिवार मे तीन या अधिक पीढ़ियों के सदस्य साथ साथ निवास करते है जिनकी रसोई,पूजा पाठ एवं संपत्ति सामूहिक होती है उसे ही सयुंक्त परिवार कहते है। हर व्यक्ति परिवार में मिलजुल कर रहना सीख जाए तो या ऐसी सोच रखे तो जीवन में दु:ख, निराशा जैसी कोई बात नहीं रहेगी। प्रेम, सद्भाव से मिलजुल कर साथ रहे यहीं जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि और धन है। संयुक्त परिवार एक अविभाजित परिवार है। यह मूल रूप से भारतीयों की विशेषता वाले एक विस्तारित परिवार को संदर्भित करता है। यह कई परिवार की पीढ़ियों से बना है, जिनमें से सभी एक ही छत के नीचे आते हैं और एक ही रिश्ते के रिश्ते से बंधे होते हैं। संयुक्त परिवार बहुत महत्वपूर्ण है और भारतीयों के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण संकेत है यही कारण है कि कई परिवार सह-अस्तित्व के ऐसे तरीकों को रखना पसंद करते हैं।

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