भारत में प्रकृति पूजा का अभिप्राय

भारत में प्रकृति पूजा का अभिप्राय

मैहर [ महामीडिया] भारत में प्रकृति पूजा का बहुत पुराना और सुंदर इतिहास है। हमारे देश में ‘पंच तत्व’ यानी धरती, जल, आकाश, वायु और अग्नि की पूजा होती है। इसके अलावा दैनिक चक्र और मौसम परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सूर्य और चंद्र की भी पूजा होती है। छठ पूजा के प्रसाद में डाभ नींबू  का होना बहुत जरूरी है। डाभ नींबू  को चकोतरा भी कहते हैं। यह बाहर से पीला और अंदर से लाल होता है। प्रसाद के तौर पर छठी मां को डाभ नींबू  का अर्पण किया जाता है। नींबू में आयरन तो कम मात्रा में ही होता है, लेकिन इसमें मौजूद विटामिन सी शरीर को आयरन के एब्जॉर्पशन में मदद करता है। इससे हीमोग्लोबिन बढ़ जाता है और एनीमिया की स्थिति नहीं बनती है। आप अगर वेट लॉस करना चाहते हैं, तो बाकी वेट लॉस फ्रेंडली फलों की तरह यह फल भी बहुत ही फायदेमंद है। डाब नींबू  को वजन घटाने के लिए भी फायदेमंद माना जाता है।यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने, आभार व्यक्त करने का सुंदर तरीका है।दिवाली के बाद उत्तर भारत के लोकप्रिय त्योहार छठ पूजा में सूर्य की ही पूजा होती है। इसमें सूर्य देव और छठी मैया की आराधना होती है और भोग चढ़ाया जाता है। इस भोग में एक विशेष फल ‘डाभ नींबू’ भी चढ़ाया जाता है।यह फल नींबू का ही एक प्रकार है। यह आकार में सामान्य नींबू से काफी बड़ा होता है। हालांकि इनके पोषक तत्व कमोबेश एक जैसे ही होते हैं। नींबू में कई विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं। यह पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और वेट लॉस में मदद करता है। यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखता है और हार्ट हेल्थ के लिए भी लाभदायक है। भारत में प्रकृति पूजा का मतलब है, प्रकृति की प्राकृतिक घटनाओं और उसकी आत्माओं की पूजा करना। प्रकृति पूजा को नैचुरिज्म या फ़िज़ियोलाट्री भी कहा जाता है। प्रकृति पूजा में सूर्य, चंद्रमा, तारे, पहाड़, नदियां जैसी प्राकृतिक घटनाओं को पवित्र और दिव्य माना जाता है। 

 

 

 

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