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SC ने जाति आधारित जनगणना रोकने वाली याचिका खारिज की
नई दिल्ली (महामीडिया): उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को जाति आधारित जनगणना रोकने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और जनहित याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर याचिकाकर्ता को फटकार लगाई।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता से स्पष्ट रूप से नाराज दिखे। उन्होंनेन्हों नेव्यक्तिगत रूप से पहुंच याचिकाकर्ता से कहा, 'इस पिटीशन में जिस भाषा का इस्तेमाल हुआ है, उसे आपने कहा से सीखा है? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आप लोग? कैसे याचिका लिखते हैं आप लोग।'
इस याचिका को चिराग हरिवंदन मोदी ने दाखिल किया था। लाइव लॉ के अनुसार, इसमें मांग की गई थी कि केंद्र को जाति जनगणना रोकने के आदेश जारी किए जाएं। साथ ही अनुरोध किया गया था कि ऐसे परिवारों को आर्थिक फायदा देने के लिए नीति बनाई जाए, जिनका एक ही बच्चा है।
जनवरी में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश में होने वाली जनगणना का काम दो हिस्सों में बांटा गया है। जाति जनगणना दूसरे चरण के दौरान की जाएगी। सरकार ने कहा है कि पहले चरण में मकानों की सूची बनाना और उनकी गणना करना शामिल होगा। दूसरे चरण के दौरान जाति जनगणना का काम किया जाएगा। सरकार ने 22 जनवरी को पहले चरण के दौरान पूछे जाने वाले 33 प्रश्नों को अधिसूचित किया था।