म.प्र.में अब बिजली खरीदी और आपूर्ति का सौदा कैबिनेट तय करेगी
भोपाल [ महामीडिया] म.प्र.में बिजली खरीदी और आपूर्ति के समझौते अब बिना कैबिनेट की मंजूरी के नहीं होंगे। कंपनी ने इस आशय का प्रस्ताव पारित किया है। अब इसे अंतिम निर्णय के लिए कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। प्रदेश में अभी 1,795 छोटे-बड़े और दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौते लागू हैं जिनसे लगभग 26,012 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हो रही है। इस वजह से मध्य प्रदेश फिलहाल ऊर्जा सरप्लस राज्य माना जाता है। अब बायोमास, सोलर बैटरी स्टोरेज, पंप हाइड्रो स्टोरेज और न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े प्रस्ताव तेजी से आ रहे हैं। ऐसे में इन परियोजनाओं पर निर्णय लेने से पहले वित्त विभाग और राज्य शासन का अभिमत लेना जरूरी हो गया है। मध्य प्रदेश पावर मैनेजमेट कंपनी ने पिछले दिनों अपनी बोर्ड बैठक में यह निर्णय लिया कि भविष्य में जो भी नई दीर्घकालीन और मध्यकालीन बिजली खरीद समझौते और बिजली आपूर्ति समझौते किए जाएंगे उन्हें कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही लागू किया जा सकेगा।नीति में बदलाव का प्रमुख कारण दीर्घकालीन बिजली खरीद समझौते से जुड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताएं हैं जो वर्षों तक सरकार को प्रभावित करती है। वर्तमान में बायोमास, सौर बैटरी भंडारण, पंप हाइड्रो भंडारण, परमाणु ऊर्जा जैसी नई तकनीकों से उत्पादित होने वाली ऊर्जा के अनुबंधों के प्रस्ताव आ रहे हैं इनके बारे में राज्य शासन और वित्त विभाग का परामर्श की आवश्यकता महसूस हो रही है।