भावातीत ध्यान की नियमित साधना से ही सभी का उत्थान संभव : ब्रह्मचारी गिरीश जी

भावातीत ध्यान की नियमित साधना से ही सभी का उत्थान संभव : ब्रह्मचारी गिरीश जी

भोपाल [महामीडिया ] महर्षि सेंटर फॉर एजुकेशनल एक्सीलेंस, भोपाल में 15 दिवसीय भावातीत ध्यान एवं सिद्धि प्रशासकों का  पुनर्बोध कार्यक्रम  प्रारंभ हुआ। दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष वेद विद्या मार्तंड ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि महर्षि जी के समय में यज्ञ एवं साधना में जिनकी रुचि हुआ करती थी उनके लिए भावातीत ध्यान एवं सिद्धि शिक्षक पाठ्यक्रम एक विशेष अवसर हुआ करता था। यदि  साधना नहीं होगी तो प्रभाव नहीं होगा I यदि प्रभाव नहीं होगा तो  भावातीत ध्यान शिक्षक का सम्मान नहीं होगा। इसलिए आप सभी लोगों को   भावातीत ध्यान शिक्षक का सम्मान बनाकर रखना होगा और यह तभी संभव है जब हम साधना को निरंतर जीवन में अपनाएं।                  ब्रह्मचारी गिरीश जी का कहना था कि ध्यान शिक्षक की मर्यादा एवं महत्व है I महर्षि जी ने स्वयं  देने का प्रशिक्षण वर्ष 1957 में प्रारंभ किया था जिससे आज तक पूरी दुनिया में विश्व व्यापी प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों की संख्या 50 लाख तक पहुंच चुकी है। ब्रह्मचारी जी ने विस्तार पूर्वक बताया कि आज पूरे विश्व में महर्षि संस्थान जहां खड़ा है वह ध्यान शिक्षकों की वजह से ही है।                          
        महर्षि जी के जीवन से जुड़े विविध प्रसंगों की चर्चा करते हुए उन्होंने भावातीत ध्यान एवं सिद्धि की प्रासंगिकता एवं उपयोगिता पर विस्तार पूर्वक प्रकाश डाला। उनका कहना था कि चेतना एक तरंग के रूप में चलती है एवं चलायमान है किंतु स्थिर नहीं है। चेतना के अभ्यास एवं चेतना की शुद्धि से शुद्ध चेतना प्राप्त होती है और यही हमारे साधना का क्रम होता है जिसमें निरंतरता आवश्यक है। यदि ज्ञान शक्ति जागृत होगी तो क्रिया शक्ति अपने आप जागृत हो जाएगी।                                इस अवसर पर ब्रह्मचारी गिरीश जी ने  बताया कि आप लोगों को केवल विद्यालय में ध्यान नहीं सिखाना है बल्कि वार्ड शहर एवं मोहल्ले में भी इसका प्रचार एवं प्रसार करते हुए आप सभी को भावातीत ध्यान एवं सिद्धि का प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि महर्षि ज्ञान का लाभ आम  जनों  को मिल सके।      
        इस कार्यक्रम का आयोजन महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह एवं महर्षि वेद विज्ञान विश्व विद्या पीठम द्वारा आयोजित किया जा रहा है जो की 15 दिवस तक निरंतर चलेगा इसमें देश के विभिन्न महर्षि विद्या मंदिर विद्यालयों में कार्यरत ध्यान शिक्षक एवं शिक्षिकाएं जिनकी संख्या 80 से अधिक है प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।      
        इस अवसर पर मंच पर महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय के पूर्व कुलगुरु प्रोफेसर भुवनेश शर्मा, महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के निदेशक संचार एवं जनसंपर्क विजय रत्न खरे, संयुक्त निदेशक रामदेव द्विवेदी एवं महर्षि भावातीत ध्यान एवं सिद्धि के राष्ट्रीय समन्वयक राम विनोद गौर उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि संस्थान की परंपरा अनुसार श्री गुरु परंपरा पूजन से प्रारंभ हुआ।

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