संविधान पीठ ने हिंदू धर्म को जीवन जीने का तरीका बताया

संविधान पीठ ने हिंदू धर्म को जीवन जीने का तरीका बताया

भोपाल [ महामीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को कहा कि हिंदू धर्म जीवन जीने का तरीका है। हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या पूजा-पाठ जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि घर में दीया जलाना भी आस्था दिखाने के लिए पर्याप्त है। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ ने की। बेंच धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव, सबरीमाला मंदिर और दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े धार्मिक स्वतंत्रता मामलों पर सुनवाई कर रही है। आज बुधवार को सुनवाई का 15वां दिन है। बेंच में जस्टिस बी वी नागरत्ना, एम एम सुंद्रेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी वराले, आर महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

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