धर्म : ब्रह्मांड की माता कामधेनु
भोपाल [ महामीडिया]
एक बार का समय था जब भगवान श्रीकृष्ण श्रीराधा और अन्य गोपियों वृंदावन में भ्रमण कर रहे थे। उस समय भगवान श्रीकृष्ण को दूध पीने का मन किया। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए लीला के तहत अपने शरीर के बाएं हिस्से से एक तेजस्विनी गाय को प्रकट किया जिसे माता सुरभि और कामधेनु गाय के नाम से जाना जाता है। कामधेनु गाय के साथ एक बछड़ा भी प्रकट हुआ जिसका नाम मनोरथ था। इसके बाद श्रीकृष्ण के ग्वाल-बाल ने बर्तन में माता सुरभि का दूध निकाला। दूध अमृत के समान मीठा था। श्रीकृष्ण ने कामधेनु गाय का दूध पिया। इसके बाद श्रीकृष्ण हाथ से दूध का बर्तन छूटकर धरती पर गिर गया। सारा दूध भूमि पर फैल गया। दूध ने अत्यंत विशाल क्षेत्र का रूप ले लिया। दूध से बना इसी महासरोवर को क्षीर सरोवर के नाम से जाना गया। इसी तरह से क्षीर सरोवर की उत्पति हुई। यह क्षीर सरोवर राधा रानी और गोपियों के खेलने के काम आने लगा। भगवान श्रीकृष्ण की इच्छा से माता सुरभि से बहुत सारी गाएं और बछड़े पैदा हुए। इसके बाद श्रीकृष्ण ने सर्वप्रथम माता सुरभि की विशेष पूजा-अर्चना की। इसी के बाद तीनों लोकों में गौ-माता की पूजा-अर्चना करने की परंपरा की शुरुआत हुई। इसलिए हिंदू धर्म में गाय को ब्रह्मांड की माता माना जाता है जिसके भीतर सभी देवी-देवताओं का वास होता है। प्रकृति खण्ड और श्रीकृष्ण जन्म खण्ड में क्षीरसरोवर की उत्पत्ति का विस्तृत वर्णन किया गया है इसके अलावा देवी भागवत पुराण के नवम स्कन्ध में भी सुरभि गाय के प्रकट होने का वर्णन मिलता है।