बॉम्बे हाईकोर्ट ने भविष्य निधि संगठन को फटकार लगायी
भोपाल [ महामीडिया] भविष्य निधि संगठन के उन लाखों सब्सक्राइबर्स के लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर आई है जो ‘हायर पेंशन’ यानी ज्यादा पेंशन पाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि अगर किसी कर्मचारी का एम्पलॉयर कुछ जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे ‘फॉर्म 6A’ या ‘चालान’ जमा नहीं कर पाता है तो सिर्फ इस तकनीकी आधार पर उसकी पेंशन नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पेंशन पाना कर्मचारी का अधिकार है और किसी कंपनी की लापरवाही या रिकॉर्ड की कमी की सजा कर्मचारी को नहीं मिलनी चाहिए। कोर्ट ने भविष्य निधि संगठन के इस रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि डिपार्टेमेंट को ‘चेकलिस्ट’ के पीछे भागने के बजाय जमीनी हकीकत देखनी चाहिए। अगर कर्मचारी के पास यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि उसने ज्यादा वेतन पर योगदान दिया है तो एक-दो कागजों की कमी को ‘फाटक’ मानकर दावा खारिज करना गलत है। इस फैसले के बाद भविष्य निधि संगठन की भूमिका अब केवल एक रिसीवर की नहीं रह गई है। अब डिपार्टेमेंट को एक सक्रिय जांचकर्ता की तरह काम करना होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगर कोई डॉक्यूमेंट गायब है तो भविष्य निधि संगठन खुद कंपनी से संपर्क करे और रिकॉर्ड मांगे। इसके साथ ही डिपार्टेमेंट को अपने आंतरिक डेटाबेस, मेंबर लेजर और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की पड़ताल करनी होगी ताकि यह पता चल सके कि कर्मचारी की बात में कितनी सच्चाई है।