भारत की पहली स्वदेशी मलेरिया रोधी दवा आज ही बनी थी
नवीनतम
भारत की पहली स्वदेशी मलेरिया रोधी दवा आज ही बनी थी
2026-04-25
भोपाल [ महामीडिया]
मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के विरुद्ध भारत ने खुद को सिर्फ 'जेनेरिक दवाइयों की फार्मेसी' तक सीमित रखने की बजाय, रिसर्च और इनोवेशन की दुनिया में एक लंबी छलांग लगाई है। 'सिनरियाम' भारत की पहली स्वदेशी मलेरिया रोधी दवा है जिसने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया था। विश्व मलेरिया दिवस के ही मौके पर 25 अप्रैल 2012 को रैनबैक्सी लैबोरेटरीज ने 'सिनरियाम' को बाजार में उतारा था। यह दवा मुख्य रूप से वयस्कों में होने वाले 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' मलेरिया के इलाज के लिए बनाई गई थी।यह भारत के फार्मास्यूटिकल इतिहास का पहला मौका था जब किसी भारतीय कंपनी ने एक नए मॉलिक्यूल को रिसर्च से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और कमर्शियल लॉन्चिंग तक पूरी तरह से स्वदेशी स्तर पर अंजाम दिया था। मात्र तीन दिन तक रोजाना एक गोली खाने से यह दवा मलेरिया के परजीवियों का खात्मा करने में कारगर है।सिनरियाम' सिर्फ एक दवा का नाम नहीं है यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय फार्मा कंपनियां दुनिया की किसी भी जटिल बीमारी का इलाज खोजने में पूरी तरह सक्षम हैं। विश्व मलेरिया दिवस 2026 पर भारत की इस जीत को याद करना हमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा देता है।