राज्यसभा चुनाव: चुनाव आयोग से मिला कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

राज्यसभा चुनाव: चुनाव आयोग से मिला कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

नई दिल्ली (महामीडिया):  कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन खारिज किए जाने के खिलाफ बुधवार को निर्वाचन आयोग से शिकायत की और कहा कि निर्वाचन अधिकारी (आरओ) के इस असंवैधानिक तथा लोकतंत्र विरोधी फैसले को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए. कांग्रेस पार्टी के एक हाई-लेवल डेलिगेशन ने चुनाव आयोग से मुलाकात की.

नटराजन का नॉमिनेशन इसलिए खारिज कर दिया गया था, क्योंकि आरोप है कि उन्होंने हैदराबाद में दर्ज एक मामले से जुड़ी जानकारी का खुलासा नहीं किया था.कांग्रेस के डेलिगेशन में पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और पार्टी के सीनियर नेता अभिषेक मनु सिंघवी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, जयराम रमेश, भूपेश बघेल और मीनाक्षी नटराजन शामिल थे.

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से इस मामले पर मुलाकात की.कांग्रेस पार्टी ने मंगलवार को चुनाव आयोग से इस मामले में अपने डेलिगेशन के साथ बैठक के लिए समय मांगा था.

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए वेणुगोपाल ने सिंघवी और रमेश के साथ नटराजन के नॉमिनेशन को खारिज किए जाने का जिक्र करते हुए कहा, "हमने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से मुलाकात की. हमने भारत के चुनाव आयोग के साथ विस्तार से चर्चा की और तथ्य व आंकड़े पेश किए."

बैठक की जानकारी देते हुए सिंघवी, जो कांग्रेस के कानून, RTI और HR विभाग के चेयरमैन भी हैं, ने कहा, "हमने चुनाव आयोग के सामने विस्तार से अपनी बात रखी. हमने उन्हें बताया और अपने हिसाब से बिना किसी शक या विवाद के यह साबित किया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गलत आदेश दिया है."

चुनाव आयोग के नियमों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के अपने कानून, 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम'  की धारा 33A में कहा गया है कि जानकारी का खुलासा केवल उन मामलों में जरूरी है जहां सजा दो साल से अधिक हो, और सबसे बड़ी बात यह है कि केवल उन मामलों में जहां आरोप तय  किए गए हों.उन्होंने कहा कि आरोप तय करने की प्रक्रिया एक न्यायिक प्रक्रिया है और जज ही आरोप तय करते हैं.

कांग्रेस नेता ने कहा, "पहली बात ये है कि यह प्राइवेट शिकायत है. प्राइवेट शिकायत बेबुनियाद हो सकती है और उसमें कोई दम नहीं हो सकता है. दूसरा कि मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेना है, जो एक न्यायिक और स्वतंत्र प्रक्रिया है. नटराजन को केवल अदालत के सामने पेश होने और यह बताने के लिए नोटिस मिला था कि संज्ञान क्यों नहीं लिया जाना चाहिए. इसका मतलब है कि उन्हें जो नोटिस मिला, वह संज्ञान लिए जाने से पहले का था."

यह बताते हुए कि संज्ञान के बिना, कानून की नजर में कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है, उन्होंने कहा, "सिर्फ इसलिए कोई आपराधिक मामला नहीं बनता कि मैं किसी और के खिलाफ कोई आरोप लगाऊं और उस पर संज्ञान न लिया गया हो. उन्होंने संज्ञान न लिए जाने के बावजूद नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया, जिसका मतलब है कि कोई आपराधिक मामला नहीं था जिसे वह बता सकती थीं. जबकि धारा 33A कहती है कि संज्ञान लिए जाने के बाद जांच होगी. जांच के बाद चार्जशीट दाखिल होगी."

मामले में चुनाव आयोग ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है. मतदान 18 जून को होना है.

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