सुप्रसिद्ध दानवीर अज़ीम प्रेमजी दोषमुक्त

सुप्रसिद्ध दानवीर अज़ीम प्रेमजी दोषमुक्त

भोपाल [महामीडिया] 
सुप्रसिद्ध दानवीर अज़ीम प्रेमजी दोषमुक्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विप्रो के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक अज़ीम प्रेमजी के विरुद्ध श्रम कानून उल्लंघन के आरोपों से जुड़े आपराधिक मामला और समन आदेश रद्द कर दिया है । जस्टिस जफीर अहमद की एकलपीठ ने कहा कि केवल किसी व्यक्ति के पद के आधार पर उस पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती जब तक कानून में स्पष्ट रूप से ऐसा प्रावधान न हो या उसके विरुद्ध  प्रत्यक्ष भूमिका के ठोस आरोप न हों। मामला वर्ष 2016 में लखनऊ स्थित विप्रो कार्यालय में कथित श्रम कानून उल्लंघन और वैधानिक दायित्वों के पालन न किए जाने से जुड़ा हुआ था। 
इस संबंध में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में अज़ीम प्रेमजी समेत अन्य लोगों के विरुद्ध शिकायत दायर की गई थी। हाईकोर्ट में प्रेमजी की ओर से कहा गया कि लखनऊ कार्यालय की सुरक्षा सेवाएं जी4एस सिक्योर सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को आउटसोर्स की गई थीं। यह एजेंसी एक स्वतंत्र ठेकेदार है और अपने कर्मचारियों के वेतन, भविष्य निधि, ईएसआई तथा श्रम कानूनों के पालन के लिए स्वयं जिम्मेदार है। 
इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह भी दलील दी गई कि अज़ीम प्रेमजी का एजेंसी के कर्मचारियों या उसके कामकाज पर कोई प्रशासनिक या प्रबंधकीय नियंत्रण नहीं था। वह बेंगलुरु में रहते हैं और लखनऊ कार्यालय के दैनिक संचालन में भी शामिल नहीं थे । अज़ीम प्रेमजी भारत की दिग्गज आईटी कंपनी 'विप्रो'  के संस्थापक और चेयरमैन हैं उन्हें 'भारत का बिल गेट्स' और देश का सबसे बड़ा दानवीर माना जाता है उन्होंने अपनी कुल संपत्ति का लगभग 75% हिस्सा परोपकार के लिए दान कर दिया है।

सम्बंधित ख़बरें