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प्रौद्योगिकी ही न्यायपालिका के समय की बर्बादी का समाधान है : सीजेआई
जबलपुर (महामीडिया): भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को यहां कहा कि न्यायपालिका के समय की बर्बादी का प्रभावी समाधान केवल प्रौद्योगिकी है।
सीजेआई यहां मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के ‘फ्रैगमेंटेशन टू फ्यूजन : यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन के जरिये न्याय को सशक्त बनाना’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें प्रौद्योगिकी एवं एआई आधारित न्यायिक ढांचे को और मजबूत बनाने के बारे में सोचना चाहिए।’’
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘न्यायपालिका के समय की बर्बादी का प्रभावी समाधान केवल प्रौद्योगिकी है।’’
इन प्लेटफॉर्म्स को विकसित करने के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की तारीफ़ करते हुए, CJI ने कहा कि जैसा कि केंद्रीय क़ानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा है, इन तकनीकी प्रगतियों को पूरे भारत में लागू करने की ज़रूरत है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने एक समिति बनाई है जो यह देखेगी कि न्यायिक व्यवस्था के फ़ायदे के लिए, खासकर मामलों के जल्द निपटारे के लिए AI का इस्तेमाल कैसे किया जाए।
इस मौके पर मंत्री मेघवाल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और MP हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सभरवाल ने भी बात की।
CJI ने अपनी 'परजीवी' वाली टिप्पणी पर एक सख़्त शब्दों वाला स्पष्टीकरण भी जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि मीडिया की उन रिपोर्टों से उन्हें "तकलीफ़" हुई है जिनमें यह सुझाव दिया गया था कि उन्होंने युवाओं की आलोचना की है। CJI ने एक बयान में कहा, "मुझे यह पढ़कर तकलीफ़ हुई कि मीडिया के एक हिस्से ने कल एक मामूली मामले की सुनवाई के दौरान मेरी मौखिक टिप्पणियों को कैसे ग़लत तरीक़े से पेश किया।" कांत ने ज़ोर देकर कहा कि उनकी टिप्पणियाँ विशेष रूप से उन लोगों के लिए थीं जो "नकली और फ़र्ज़ी डिग्रियों" के ज़रिए क़ानूनी पेशे में आ रहे हैं, और मीडिया के एक हिस्से ने उनकी टिप्पणियों को "ग़लत तरीक़े से पेश किया।"