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कल मनाई जाएंगी अधिक स्कंद षष्ठी
नई दिल्ली (महामीडिया): वैदिक पंचांग के अनुसार, हर माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर स्कंद षष्ठी मनाई जाती है। इस दिन शिव परिवार के संग भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन साधना करने से संतान की प्राप्ति होती है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। साथ ही शुभ फल मिलता है। ऐसे में आइए आपको बताते हैं कि अधिक मास में कब मनाई जाएगी स्कंद षष्ठी।
स्कंद षष्ठी का धार्मिक महत्व
जिन लोगों को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है, तो ऐसे में स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा और व्रत करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को संतान की लंबी उम्र और जीवन में सफलता की कामना के लिए किया जाता है।
शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, अधिक स्कंद षष्ठी 21 मई को मनाई जाएगी।
ज्येष्ठ अधिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत- 21 मई को सुबह 08 बजकर 26 मिनट पर होगी।
ज्येष्ठ अधिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का समापन- 22 मई को सुबह 06 बजकर 24 मिनट पर होगा।
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04 बजकर 05 मिनट से 04 बजकर 46 मिनट तक
विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 29 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त - शाम 07 बजकर 07 मिनट से 07 बजकर 28 मिनट तक
निशिता मुहूर्त - रात 11 बजकर 57 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक
अमृत काल- रात 08 बजकर 47 मिनट से 10 बजकर 18 मिनट तक
पूजा का शुभ समय
हिंदू धर्म में उदया तिथि को बेहद महत्व दिया जाता है। स्कंद षष्ठी व्रत 21 मई को किया जाएगा। इस दिन सुबह 08 बजकर 26 मिनट के बाद षष्ठी तिथि शुरू होगी। इसके बाद भगवान कार्तिकेय की पूजा कर सकते हैं।