महेंद्रगिरी पर्वत का महत्व

महेंद्रगिरी पर्वत का महत्व

भोपाल [ महामीडिया] परशुराम भगवान विष्णु के छठवें अवतार हैं जिन्हें 8 चिरंजीवियों में से भी माना गया है। परशुराम जी का वर्णन रामायण काल से लेकर महाभारत काल में भी मिलता है। आज हम आपको महेंद्रगिरी पर्वत के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे परशुराम जी का निवास स्थान माना जाता है। महेंद्रगिरी पर्वत एक ऐतिहासिक स्थल है जो ओडिशा राज्य के गजपति जिले में पूर्वी घाट की एक प्रमुख चोटी है। यह समुद्र तल से लगभग 4,925 फीट की ऊंचाई पर स्थित है जो ओडिशा की दूसरी सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। भगवान परशुराम ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने और अपनी माता के शोक को कम करने के लिए पृथ्वी को अन्यायी राजाओं से मुक्त करने का संकल्प लिया था। उन्होंने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन कर दिया था। क्षत्रियों के विनाश के बाद उन्होंने अश्वमेध यज्ञ का आयोजन किया। जब उन्होंने आखिरी बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया तो इसके बाद उन्होंने संपूर्ण धरती को अपने गुरु ऋषि कश्यप को दान के रूप में दे दिया।

ऋषि कश्यप ने परशुराम जी को पृथ्वी से चले जाने का आदेश दे दिया। अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान परशुराम ने निर्णय लिया कि वह पृथ्वी पर नहीं रहेंगे। तब परशुराम जी दक्षिण समुद्र की ओर चले गए और समुद्र ने महेन्द्राचल पर्वत (महेंद्रगिरी पर्वत) पर उनके रहने की व्यवस्था की। माना जाता है कि परशुराम जी आज भी यहीं रहते हैं। महेंद्रगिरि पर्वत ओडिशा के गजपति जिले में पूर्वी घाट की दूसरी सबसे ऊँची चोटी है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और पौराणिक महत्व (भगवान परशुराम की तपोस्थली और पांडवों से जुड़े मंदिर) के लिए प्रसिद्ध है। यह जैव विविधता बायोस्फीयर रिजर्व भी है।

 

 

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