मानव अधिकार आयोग की सक्रियता से कई मामलों का निपटारा

मानव अधिकार आयोग की सक्रियता से कई मामलों का निपटारा

भोपाल [ महामीडिया] मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों में महिलाओं की सुरक्षा और आम आदमी की सुनवाई का क्या हाल है इसकी हकीकत मानव अधिकार आयोग की छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना जिले में हुई जनसुनवाई के दौरान सामने आई। पन्ना में तो एक महिला घूंघट में पहुंची और अपनी व्यथा सुनाई।बताया कि फॉरेस्ट गार्ड हाथ पकड़ता है। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने गए तो सुनवाई ही नहीं हुई। इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया जब जनसुनवाई में यह खुलासा हुआ कि आरोपी अधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस और वन विभाग मिलकर पीड़िता के पति को ही अवैध लकड़ी तस्करी के झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहे थे।आयोग के कड़े रुख के बाद कलेक्टोरेट व पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और डीआईजी को खुद इस मामले में दखल देना पड़ा। शिक्षा और पीएचई विभाग की एक और शर्मनाक लापरवाही पन्ना-छतरपुर में पकड़ी गई। स्कूल परिसर में पानी की टंकी बनवाई गई ठेकेदार का भुगतान हो गया, लेकिन उस टंकी से स्कूल तक पानी पहुंचाने की पाइपलाइन जोड़ना ही अफसर भूल गए। मानव अधिकार आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष एपी सिंह ने चार जिलों में पहुंचकर आयोग को प्राप्त हुई शिकायतों के निराकरण न होने के बारे में पूछा तो कलेक्टर का कहना था कि यह मामला हमारे संज्ञान में नहीं था। आयोग के संज्ञान के बाद आनन-फानन में 2 करोड़ 53 लाख रुपए का मुआवजा स्वीकृत तो कराया गया, लेकिन मैदानी स्तर पर अधिकारियों की अज्ञानता ने मप्र के प्रशासनिक ढर्रे की पोल खोलकर रख दी है।

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