नवीनतम
राजनाथ ने नौसेना शौर्य वाटिका का लोकार्पण किया
लखनऊ (महामीडिया): रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि भारतीय सेनाओं की स्मृतियों को सहेजने वाली वाटिकाएं और संग्रहालय सेना से आत्मीय रिश्ते को फिर से जीवंत कर लोगों में उसके प्रति कृतज्ञता का भाव उत्पन्न करते हैं।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ यहां इकाना स्टेडियम के पास ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का लोकार्पण करने के बाद अपने सम्बोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि यह पार्क कोई साधारण पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रेरणास्थल है और यह शौर्य वाटिका आने वाली पीढ़ियों को यह बताएगी कि आजादी और सुरक्षा की कीमत क्या होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘कई लोग यह सोच सकते हैं कि आखिर इस तरह की शौर्य वाटिका का लखनऊ में क्या काम है, लेकिन इस पर हमें सोचने की जरूरत है कि हमारी सीमाओं की हिफाजत करने वाले हमारे सैनिकों का जो बलिदान है, उनका रोज का जो संघर्ष है, उससे हमारा आत्मीय रिश्ता रोजमर्रा की भागदौड़ में पीछे छूट जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसे में यह शौर्य वाटिका हमें एक बार रुक कर सोने पर मजबूर करेगी कि जिन लोगों की वजह से हमारी यह सारी जिंदगी सुरक्षित चल रही है, उनका योगदान हमारी जिंदगी में कितना बड़ा है। उनके प्रति हमारी नई पीढ़ी कृतज्ञता का अनुभव करेगी, ऐसा मेरा विश्वास है।''
पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले को एक उदाहरण के तौर पर पेश करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले साल पहलगाम में एक कायरतापूर्ण आतंकवादी हमला हुआ था। आतंकवादियों ने धर्म पूछकर हमारे निर्दोष लोगों की हत्या कर दी थी, उसके बाद पूरे देश का खून खौल उठा था और फिर हमारी सेनाओं ने मिलकर ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया और सटीक हमले करके पाकिस्तान में स्थित आतंकी ढांचे को पूरी तरह से तबाह कर दिया था।”
रक्षा मंत्री ने कहा, “आपरेशन सिंदूर में सेना और वायु सेना ने तो अपनी भूमिका निभाई थी लेकिन जो जिम्मेदारी हमारी नौसेना ने निभाई, वह भी बहुत महत्वपूर्ण थी। उस समय हमारी नौसेना पूरी ताकत से अरब सागर में पहुंची थी। हमारे नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी बार-बार कहते थे कि हमें कब अवसर मिलेगा कि हम भी पाकिस्तान को सबक सिखा सकें। मेरी भी इच्छा होती थी कि यह अवसर काश उसे मिल जाता तो नौसेना क्या होती है, यह पूरा हिंदुस्तान समझ जाता।”
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने दुश्मन के मन में लगातार भय बनाए रखा और इसी का नतीजा है कि पाकिस्तान की पूरी नौसेना डरकर अपने बंदरगाहों में ‘दुबक कर’ बैठ गई।