चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने रचनात्मक आलोचना के लिए तैयार रहने को कहा

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने रचनात्मक आलोचना के लिए तैयार रहने को कहा

मुंबई [महा मीडिया] 

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि न्यायपालिका जनता का विश्वास हासिल करने के लिए खुद को जांच-पड़ताल से ऊपर नहीं रख सकती। न्यायपालिका को अपने कामकाज पर सवाल, जांच और आवश्यक आलोचना के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर में  बोल रहे थे। चीफ़ जस्टिस ने कहा कि न्यायिक कार्यप्रणाली की निष्पक्ष, सूचित और रचनात्मक आलोचना एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र की वैध और आवश्यक विशेषता है। इससे संस्थागत जवाबदेही और खुद को सुधारने की प्रक्रिया मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका एक संस्था के रूप में आलोचना से बचने वाली नहीं है। अदालत जनता का भरोसा तभी हासिल कर सकती है जब वह जांच, सवाल और जरूरत पड़ने पर आलोचना के लिए तैयार रहे।
 

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