संशोधित ग्राम स्वराज अधिनियम प्रदेश में लागू
भोपाल [ महामीडिया] राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। इस संशोधन के बाद अब राज्य सरकार के पास यह कानूनी अधिकार आ गया है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली रजिस्ट्रियों पर लगने वाले 'अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क' को पूरी तरह से माफ या कम कर सकेगी। चूंकि वर्तमान में मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र चालू नहीं है और मामले में तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता थी इसलिए राज्यपाल ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत 'मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज जारी कर दिया है। यह नया नियम पूरे प्रदेश में प्रभावी हो गया है। मूल अधिनियम की धारा 75 में संशोधन करते हुए एक नया प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत, भारतीय स्टाम्प अधिनियम के तहत लगने वाले नियमित शुल्क के अलावा धारा 75 के अंतर्गत जो अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क वसूला जाता था सरकार अब नोटिफिकेशन जारी कर किसी भी कानूनी दस्तावेज या विलेख को उस अतिरिक्त शुल्क से छूट दे सकेगी। मान लीजिए किसी जमीन के रजिस्ट्री दस्तावेज पर 1 लाख रुपये सामान्य स्टाम्प ड्यूटी लगती है और 10 हजार रुपये अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी लगती है। यदि सरकार संबंधित श्रेणी के दस्तावेजों को छूट देने की अधिसूचना जारी कर दे तो 10 हजार रुपये की अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी नहीं देनी पड़ेगी।भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर होने वाली रजिस्ट्रियों या गांवों में नए उद्योग या स्टार्टअप लगाने वाले उद्यमियों को जमीन खरीदते वक्त टैक्स में राहत दी जा सकती है। हालांकि यह सरकार की नीति और मंशा पर निर्भर करेगा कि वह किस वर्ग या स्थान के लोगों को छूट देना चाहती है।