बैंकों में साइबर खतरा बढ़ा
भोपाल [ महामीडिया]
रिजर्व बैंक ने बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं से कहा है कि वह जून के आखिर तक क्लॉड मिथोस जैसे फ्रंटियर आर्टिफिशल इंटेलिजेंस मॉडल से पैदा हुए जोखिमों का आकलन बोर्ड की मंजूरी के साथ पूरा करें। साथ ही रिजर्व बैंक ने इससे निपटने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने का भी निर्देश दिया है। इसमें संस्थाओं द्वारा एक व्यवस्थित साइबर सुरक्षा ढांचा स्थापित करना, एआई आधारित विरोधात्मक परीक्षण करना और मौजूदा कमजोरियों की पहचान करना शामिल है।नियामक ने एआई से संबंधित जोखिमों पर ध्यान ऐसे समय में दिया है जब फ्रंटियर एआई मॉडल ने जीरो-डे यानी तत्काल की कमजोरियों की पहचान करने की क्षमताएं प्रदर्शित की हैं। इससे उद्योग में चिंताएं पैदा हुई हैं। फिलहाल वैश्विक स्तर पर मिथोस तक पहुंच चुनिंदा कंपनियों तक ही सीमित है। ऐसे में भारतीय वित्तीय क्षेत्र की संस्थाओं से अपेक्षा की जाती है कि वह अपने संचालन में संभावित उपयोग मामलों के लिए पहले से उपलब्ध अन्य उन्नत एआई मॉडल का आकलन करें।