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लीथियम आपूर्ति श्रृंखला विकसित कर रहा है भारत
जयपुर [ महा मीडिया] इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए महत्त्वपूर्ण खनिज लीथियम की आपूर्ति सुरक्षित करने के भारत के प्रयास अब सरकार समर्थित विदेशी खदान अधिग्रहण से आगे बढ़ रहे हैं। निजी कंपनियों का एक समूह आपूर्ति श्रृंखला के विभिन्न स्तरों के बीच कड़ियां विकसित कर रहा है। इसमें विदेश में खनन और देश में रिफाइनिंग से लेकर बैटरी रीसाइक्लिंग तक की बातें शामिल हैं। हैदराबाद स्थित बैटरी सामग्री कंपनी अल्टमिन आंध्र प्रदेश में लीथियम रिफाइनरी स्थापित करने की योजना बना रही है। ग्रेटर नोएडा मुख्यालय वाली कंपनी लोहुम जिसने पिछले सप्ताह ही जिम्बाब्वे में अपने लीथियम ब्लॉकों में खनन शुरू किया है वह इस सामग्री को भारत में एक नए संयंत्र में रिफाइन करने की योजना बना रही है।आपूर्ति श्रृंखला के दूसरे छोर पर कोलकाता स्थित नवप्रकृति बैटरी रीसाइक्लिंग का विस्तार कर रही है और विदेशों से बैटरी स्क्रैप मंगाने की तैयारी कर रही है। वहीं महत्त्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र की बड़ी कंपनी एटेरो जो इस्तेमाल के बाद बेकार हो चुकी बैटरियों से लीथियम निकालती है वह लीथियम-आयन बैटरी रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाने के लिए विस्तार योजना पर काम कर रही है। यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लीथियम-आयन बैटरियों के मामले में भारत की आयात पर निर्भरता फिलहाल करीब 100 प्रतिशत है। इस आयात का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मुख्य रूप से चीन से आता है। पिछले छह वर्षों में लीथियम-आयन बैटरियों का भारत का आयात बिल करीब आठ गुना बढ़ चुका है ।