गणेश पूजा में दूर्वा का महत्व

गणेश पूजा में दूर्वा का महत्व

भोपाल [ महा मीडिया] गणेश पूजा का उत्सव 25 सितंबर तक है। इन दिनों में भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने की परंपरा है जो लोग पूरे विधि-विधान से पूजा नहीं कर पाते हैं, वे भगवान को सिर्फ दूर्वा चढ़ाकर भी पूजा का पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। क्या आप जानते हैं गणेश जी को दूर्वा इतनी प्रिय क्यों है ? एक बार भगवान गणेश ने अनलासुर को पकड़ लिया और उसे निगल लिया। इसके बाद गणेश जी के पेट में बहुत तेज जलन होने लगी। देवताओं और ऋषियों ने कई उपाय किए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।तब कश्यप ऋषि ने दूर्वा की 21 गांठें बनाईं और भगवान गणेश को खाने के लिए दीं। जैसे ही गणेश जी ने दूर्वा ग्रहण की, उनके पेट की जलन शांत हो गई। इस घटना के बाद भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई। इसी वजह से गणेश पूजा में दूर्वा की 21 गांठें चढ़ाने की परंपरा प्रचलित है। गणेश पूजा में दूब घास) का विशेष महत्व है और इसके बिना भगवान गणेश की पूजा अधूरी मानी जाती है। गणेश पूजा में दूर्वा (हरी घास) का विशेष और सर्वोच्च स्थान है जिसे फूलों से भी अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। 

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