समाज के उत्थान हेतु साधना का निरंतर होना आवश्यक है : ब्रह्मचारी गिरीश जी

समाज के उत्थान हेतु साधना का निरंतर होना आवश्यक है : ब्रह्मचारी गिरीश जी

भोपाल [ महामीडिया] अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज महर्षि महेश योगी संस्थान में भी योग दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। संस्थान द्वारा संचालित महर्षि विद्या मंदिर स्कूलों के अनेक छात्र-छात्राओं ने योग एवं भावातीत ध्यान का अभ्यास किया। इस अवसर पर महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय समूह के अध्यक्ष ब्रह्मचारी गिरीश जी ने  कहा कि समाज और व्यक्तित्व के  विकास के लिए योग और ध्यान साधना की निरंतर आवश्यकता है। इससे मन, बुद्धि एवं शरीर का उचित समन्वय होता है। इस प्रक्रिया से हमारे शरीर को, हमारे मन को, हमारी आत्मा को पूर्ण लाभ मिलता है ।                                   वैश्विक संत महर्षि महेश योगी जी के जीवन के विविध प्रसंगों का उल्लेख करते हुए ब्रह्मचारी जी बताया कि ब्रह्म विद्या साधना की विधा है, ज्ञान को जगाने वाली विद्या है यही कारण है कि भावातीत ध्यान के अभ्यास से सब कुछ प्राप्त हो जाता है।                                                                       ब्रह्मचारी गिरीश जी ने कहा कि हम सभी को नित्य अष्टांग योग की साधना करते हुए प्रत्येक समाज एवं स्थान पर हमें ब्रह्म विद्या का प्रचार प्रसार निरंतर करना चाहिए।  
       ब्रह्मचारी जी ने  बताया कि महर्षि महेश योगी जी ने वर्षों पूर्व योग और भावातीत ध्यान  की नींव रखी और विश्व भर को इस प्रक्रिया के बारे में बताया। जिसके फल स्वरुप  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में पहली बार संयुक्त राष्ट्र में इसको मान्यता दिलवाई। इसलिए संपूर्ण राष्ट्र उनका धन्यवाद ज्ञापित करता है।                                                                कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि संस्थान की परंपरा अनुसार गुरु परंपरा पूजन एवं शांति पाठ के साथ प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने सूर्य नमस्कार, प्राणायाम एवं भावातीत ध्यान का सामूहिक अभ्यास किया । इस अवसर पर  प्रो. भुवनेश शर्मा, विजय रत्न खरे, वेद प्रकाश तिवारी, श्रीमती आर्या नंद कुमार, मनीष मांडलिक, मनीष सिन्हा, राम देव द्विवेदी, अखिलेश श्रीवास्तव, एम.के.सिंघल एवं गिरि बल सिंह लोधी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का आयोजन नर्मदा पुरम मार्ग स्थित महर्षि विद्या मंदिर विद्यालय रतनपुर के महर्षि मंगलम भवन में रखा गया था।

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