विश्व गोरिल्ला दिवस आज

विश्व गोरिल्ला दिवस आज

नई दिल्ली (महामीडिया):  गोरिल्लाओं का अस्तित्व आज जंगलों के संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा से जुड़ी बड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान खींचता है। दुनिया के प्रभावशाली और बुद्धिमान प्राइमेट्स में शामिल इन जीवों के संरक्षण, प्राकृतिक आवास की रक्षा और उनके सामने मौजूद खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 24 सितंबर को विश्व गोरिल्ला दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत 2017 में हुई थी। 24 सितंबर की तारीख संरक्षण के इतिहास में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि 1967 में इसी दिन संरक्षणवादी डायन फॉसी ने रवांडा के जंगलों में करिसोके रिसर्च सेंटर की स्थापना की थी।


गोरिल्ला दिवस का इतिहास
24 सितंबर 1967 को डायन फॉसी ने रवांडा के विरुंगा पर्वतीय क्षेत्र में दो छोटे टेंट लगाकर पर्वतीय गोरिल्लाओं का अध्ययन शुरू किया था। उन्होंने इस केंद्र का नाम करिसोके रखा, जो माउंट करिसिम्बी और माउंट बिसोके के नामों से मिलकर बना था। आगे चलकर करिसोके गोरिल्ला अनुसंधान और संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बना। इसी ऐतिहासिक तारीख को आधार बनाकर 2017 में पहला विश्व गोरिल्ला दिवस मनाया गया। इसका उद्देश्य गोरिल्लाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ उनके संरक्षण में लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना भी है।


गोरिल्लाओं की प्रमुख प्रजातियां
गोरिल्लाओं को मुख्य रूप से दो प्रजातियों में बांटा जाता है—पूर्वी गोरिल्ला और पश्चिमी गोरिल्ला। इनके भीतर अलग-अलग उपप्रजातियां पाई जाती हैं। पर्वतीय गोरिल्ला पूर्वी गोरिल्ला की एक उपप्रजाति है। इसका प्राकृतिक क्षेत्र रवांडा, युगांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के सीमावर्ती विरुंगा क्षेत्र तथा युगांडा के ब्विंडी क्षेत्र तक सीमित है। आईयूसीएन की उपलब्ध प्रजाति जानकारी में पर्वतीय गोरिल्ला को ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ श्रेणी में रखा गया है।

संरक्षण से मिली उम्मीद
गोरिल्ला संरक्षण की कहानी केवल संकट की कहानी नहीं है। पर्वतीय गोरिल्लाओं के मामले में लंबे समय तक किए गए संरक्षण प्रयासों से आबादी में वृद्धि दर्ज की गई है। आईयूसीएन के 2018 के आकलन के अनुसार, 2008 में करीब 680 पर्वतीय गोरिल्लाओं का अनुमान था, जबकि 2018 में इनकी संख्या 1,000 से अधिक आंकी गई थी। इस वृद्धि में गहन संरक्षण, अवैध शिकार विरोधी गश्त और पशु चिकित्सा हस्तक्षेप जैसे उपायों की भूमिका बताई गई थी। हालांकि, संख्या में सुधार का मतलब खतरा पूरी तरह खत्म होना नहीं है। सीमित प्राकृतिक आवास, बीमारी, मानवीय गतिविधियों और अन्य दबावों के कारण लगातार संरक्षण जरूरी है।

विश्व गोरिल्ला दिवस का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य अगली पीढ़ी को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना भी है। स्कूलों, प्रकृति क्लबों और स्थानीय कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को गोरिल्लाओं और उनके जंगलों के बारे में जानकारी दी जाती है। बचपन से वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित होने पर संरक्षण केवल सरकारी एजेंसियों या विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी बनता है। कई संरक्षण संगठनों के कार्यक्रमों में स्थानीय स्कूलों और प्रकृति क्लबों को भी जोड़ा जाता है।

गोरिल्लाओं का संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा
विश्व गोरिल्ला दिवस हमें याद दिलाता है कि किसी एक प्रजाति का संरक्षण केवल उसके अस्तित्व को बचाने तक सीमित नहीं है। गोरिल्लाओं के जंगलों को सुरक्षित रखने का मतलब जैव विविधता, स्थानीय पारिस्थितिकी और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी है। गोरिल्लाओं की कहानी में खतरे और उम्मीद दोनों मौजूद हैं। एक ओर उनका आवास सीमित है और बीमारी, अवैध शिकार तथा मानवीय दबाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर दशकों के वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण प्रयासों ने यह दिखाया है कि संगठित प्रयासों से सकारात्मक बदलाव संभव है। विश्व गोरिल्ला दिवस इसी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का अवसर है कि जंगलों और उनमें रहने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा मानव समाज के भविष्य से भी जुड़ी हुई है।

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