बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा

बीमा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा

भोपाल [ महामीडिया] बीमा नियामक ने कुछ बीमा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की परफॉर्मेंस आधारित सैलरी पर रोक लगा दी है। यह कदम उन कंपनियों के खिलाफ उठाया गया है जो “एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट” से जुड़े तय लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सकीं या फिर तय किए गए सुधार के रास्ते पर आगे नहीं बढ़ीं।यह फैसला वित्त वर्ष 2024-25 के प्रदर्शन और वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआती तिमाहियों के रुझानों की समीक्षा के बाद लिया गया है। नियामक ने साल 2026 के शुरुआती महीनों में भी कंपनियों की स्थिति का आकलन किया था। जिन कंपनियों का खर्च स्तर तय सीमा से काफी ऊपर पाया गया और जिन्होंने अपने तय “ग्लाइड पाथ” का पालन नहीं किया प्रदर्शन आधारित भुगतान को मंजूरी नहीं दी। हालांकि नियामक ने अधिकारियों की फिक्स सैलरी में कोई दखल नहीं दिया है।नियमों के अनुसार सामान्य बीमा कंपनियां अपने ग्रॉस रिटन प्रीमियम का अधिकतम 30 प्रतिशत तक प्रबंधन खर्च कर सकती हैं। वहीं स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के लिए यह सीमा 35 प्रतिशत तय की गई है।अगर कोई कंपनी इन सीमाओं से ऊपर जाती है, तो उसे बोर्ड से मंजूर एक योजना देनी होती है जिसमें बताया जाता है कि वह तय समय तक खर्च को कैसे नियंत्रित करेगीनियमों में पांच साल से कम पुरानी बीमा कंपनियों के लिए कुछ राहत का प्रावधान भी रखा गया है। ऐसी कंपनियों को जरूरत के आधार पर नियामकीय छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके बावजूद उन्हें भी अपने खर्च नियंत्रण की स्पष्ट योजना दिखानी होती है।

 

 

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