अहोई अष्टमी पर्व एक नवंबर को
भोपाल [ महा मीडिया] अहोई अष्टमी का व्रत माताओं द्वारा संतान की लंबी आयु और खुशहाल जीवन की कामना से रखा जाता है। यह व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और तारों को अर्घ्य देकर इसका समापन किया जाता है। वहीं कुछ महिलाएं इस व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देकर करती हैं। पंचांग अनुसार इस साल अहोई अष्टमी की तिथि का प्रारंभ 1 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 51 मिनट पर होगा और इसका समापन 2 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 10 मिनट पर होगा। अहोई अष्टमी के दिन मातायें अपनी संतानों की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रहती हैं। इस व्रत का पारण मुख्य रूप से सायाह्नकाल में तारों को देखने के बाद किया जाता है। इस व्रत को अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है।