डेटा सेंटरों को ग्रामीण विकास में भूमिका निभानी होगी
मुंबई [महा मीडिया]
भारत में इंटरनेट, ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल भुगतान, आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस और क्लाउड सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इसका लाभ सिर्फ बड़ी तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। डेटा सेंटर तेजी से बढ़ेंगे तो उन्हें बनाने और चलाने के लिए जमीन, बिजली के उपकरण, कूलिंग सिस्टम, केबल, जनरेटर और सर्वर की भी बड़ी जरूरत होगी। ऐसे में इस पूरे कारोबार से जुड़ी कई दूसरी कंपनियों के लिए भी कमाई के नए मौके खुल सकते हैं। इस बड़े निवेश का लाभ डेटा सेंटर चलाने वाली कंपनियों के साथ बिजली के उपकरण, केबल, कूलिंग और बैकअप पावर बनाने वाली कंपनियों को भी मिल सकता है।भारत में किराये पर उपलब्ध डेटा सेंटर की क्षमता 2026 में करीब 2,076 मेगावॉट रहने का अनुमान है। 2031 तक यह बढ़कर करीब 9,576 मेगावॉट पहुंच सकती है यानी पांच साल में क्षमता करीब पांच गुना हो सकती है। पिछले पांच साल में भी डेटा सेंटर की क्षमता करीब पांच गुना बढ़ी है। अब अगली तेजी की वजह क्लाउड सेवाएं, इंटरनेट और ऑनलाइन कारोबार का बढ़ता उपयोग सरकारी और निजी कंपनियों का डिजिटलीकरण और देश के भीतर डेटा रखने से जुड़े नियम हैं। अभी डेटा सेंटर की मांग में बड़ी तकनीकी और क्लाउड कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है जबकि बैंक और वित्तीय कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 15 प्रतिशत है। डेटा सेंटरों में उपयोग का स्तर भी 95 से 97 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। मुंबई और चेन्नई फिलहाल बड़े केंद्र बने हुए हैं। इसकी बड़ी वजह समुद्र के नीचे बिछी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट केबल तक उनकी आसान पहुंच है। आने वाले समय में अदाणी कॉनेक्स, भारती एयरटेल और टीसीएस के निवेश से क्षमता और बढ़ सकती है।